Episode – 1
Jarmani
Jarmani college campus – AMIS college
morning 11: 30
“देखो आज भी टॉप तुम करने वाली हो मिशु! और तुम्हारे बाद वो नील अग्निहोत्री, पता है कल कैसे देख रहा था। तुम्हें घुर घुरकर , पर पता है मेरा दिल ही धडक रहा था। “
पर साथ में चल रही लडकी का रियाकशन ना के बराबर ही था।
खुशी ने कहा,” अरे यार में तुमसे बात कर रही हूं। कोई भुत प्रेत से नहीं सवाल करने पर हां.. हूं .. कुछ तो रियाकशन होना चाहिए। “
मिष्टी जिसके कानों में ब्ल्यूटूथ थे। वो निकाल कर अपना सर घुमा कर खुशी को देखती है, फिर अपना फोन ऑफ कर बोली ने कहा,” बोलो क्या बात कर रही थी तुम। “
खुशी गुस्से मे अपना मुंह फुलाकर मन ही मन में इतना कुछ बोला और इस लड़की ने सुना ही नहीं,
“तो में क्यों फालतू में अपना मुंह चला रही थी।”
इसका कुछ नहीं हो सकता । ये लड़की बस जब देखो तब बुक्स, क्लास इन सबमें अपनी जिंदगी डुबा कर रखती है। प्यार कब करेगी लाइफ इनजोय कब करेगी।
मिष्टी ने कहा,” अब बोलना क्या बात करनी थी तुझे , में सुन रही हूं।
खुशी ने कहा,” मुंह बनाकर क्या फ़ायदा जो सुनना था वो नहीं सुना। अब क्या बार बार वही कहूं, चल जाने दे । खुशी ने ये कहा पर वो चाहती थी। मिष्टी उसे मनायें पर ये लड़की ,
मिष्टी ने कहा,” ओके चल जल्दी हम लेट है । आज सारी फोरमिलिटी कंमप्लीट करनी है ।
कल पता है ना क्या है।
तभी दोनों के सामने एक लड़का आकर खड़ा हो जाता है। मिष्टी पानी पीने के बाद बोतल झुककर बैग में रख रही थी। वही खुशी खुशी के मारे पागल हो रही थी।
मानो सामने वाला लड़का उसके लिए ही आया था।
नील अग्निहोत्री ,
जो हैंडसम के साथ साथ होशियार भी था। गुड लुकिंग भी। उसकी गुड लुक्स की वजह से पुरी मेडीकल कॉलेज की लडकीयां उसकी दीवानी थी। पर वो तो बस मिष्टी को पंसद करता था। दोनों में शुरू में अच्छी दोस्ती भी हुई , पर जबसे नील ने मिष्टी को प्रपोज किया था। तब से मिष्टी उससे दूर रेहने लगी। नील की उम्र भी मिष्टी जितनी ही , मिष्टी के बाद टॉप करने वाला।उसे फिर एक बार अपने सामने देखकर मिष्टी दुसरी तरफ से जाने की कोशिश करने लगी।
वहां खड़ी खुशी तो दोनों को ही देख रही थी। खुशी आपने मन में , “हाय राम! मुझे भी ऐसा ही कोई दे , जो मेरे पीछे पागल बनकर घुमे। जैसे ये लड़का तीन सालों से घुम रहा है मिष्टी के पिछे।”
नील ने कहा,” ने मिष्टी की कलाई पकड़ कर कहा , क्या बात है मिष्टी, आज भी नाराज़ हो, पर मैंने गलत क्या कहा है? तुमसे प्यार करता हूं । हम ने कहा,”दोनों का प्रोफेशन एक ही होगा , अच्छी मेहनत कर हम। “
मेरी फैमिली का में एकलौता वारिस हूं । मेरी फैमिली को मेंने बता दिया है । उनको कोई…..पर उसकी बात पुरी होने से पहले ही , मिष्टी एकदम से नील के हाथों से अपना हाथ छुड़ाकर बोली, “नहीं कर सकती में , नाही मेरी जिंदगी में उस चीज के लिए जगह है ”
नील ,”पर क्यों?”
मिष्टी कुछ देर कुछ नही केहती। यहा पर खुशी को समझ नहीं आ रहा था । ये लड़की ऐसी क्यों है। उसकी जगह वो होती तो! वो झट से नील के गले लग जाती। पर वो नहीं है ना यही तो बात थी। मिष्टी ने कहा,” इसलिए ये जिंदगी मेरी अपनी नहीं है। वो किसी की उधार है। में उनके अरमानों का गला नहीं घोट सकती , वो जहां कहेंगे में वही शादी करूंगी।”
नील,” पर क्यों? “
मिष्टी ने कहा,”क्यों की मुझे प्यार, व्यार पर यकीन नहीं हैं। ओर जहां यकीन नहीं होता , उस रास्ते पर चलना बेवकूफी होगी ना? “
मिष्टी की बातें सुनकर नील के दोस्तों के साथ साथ खुशी भी शॉक्ड थी। तबतक मिष्टी नील के हाथों से हाथ छुड़ाकर चली जाती है, नील उसे पीछे से बस ख़ाली आंखों से देखता रेह जाता है।
एक दिन बाद
आज सबका यहां मेडीकल कॉलेज का लास्ट दिन था। इसके बाद उनकी जिंदगी एक नया मोड़ लेने वाली थी, पुरा ओडोटोरियम कोलेज स्टुडेंट से भरा हुआ था। साथ में उनके सारे पैरेंट्स भी , सबकें चेहरे की खुशी देखने लायक थी। सबलोग आज अपने डॉक्टर की डिग्री लेने के लिए बहुत ही उत्साहित नजर आ रहे थे।
होते भी क्यों नहीं ! सबका आज सपना पुरा होने जा रहा था। डॉक्टर बनने का साढ़े चार साल से की गई मेहनत का फल आज उनको मिलने वाला था। एक एक कर पुरा ओडोटोरियम फुल हो गया था। ये उसी कोलेज का बैक एरिया था पर यहां सबका आज लास्ट डे था। आज के बाद वो लोग यहां स्टुडेंट बनकर नहीं रेहने वाले थे। सब एक ने कहा,”दूसरे से मिल रहे थे। क्यों की आज के बाद मिलते भी या नहीं पता था, सब अलग अलग देश और जगह से यहां आये थे।”
करीब दस मिनट बाद सबकुछ शांत हुआ। उपर स्टेज पर सारे प्रोफेसर लोग आकर बैठ गये, ये तो बस शुरुवात है, मिस्टर कपूर ने कहा ओर सबको देखने लगे ये थोड़े मजाकिया टाइप के सर थे ।
जिन्होंने सबको थोड़ी बातें बताई और स्टुडेंट के साथ उनके एक्सपीरियंस शेयर किया। थोड़ा सा हंसा भी था। जो उनकी खासियत थी। सारे लोग शांति से सुन रहे थे।
अब बारी थी जिसके लिए यहां सबको बुलाया गया था। उस रिजल्ट की
Congratulations my dear friend and students…
सबसे पूरे नंबर दस में आने वाले लोगों का नाम लिया गया था।एक एक कर सबको बुलाया गया ओर उनके अचीवमेंट पर उनको एप्रिशिएट भी किया गया था।
Miss mishti Mukherjee,
लास्ट में ये नाम आया ओर तालियों की गड़गड़ाहट ने सारा ओडोटोरियम गुंज उठा। पर जिसे खुश होना चाहिए था । उसके चेहरे पर उसका नामोनिशान नहीं था।
कोलेज में टोप करने के लिए, प्रोफेसर सर ने उसके सर पर ब्लैक कैंप पेहनाई ओर उसे अपने आने वाले फयुचर के लिए बेस्ट विशेस दि थी । कोटन की व्हाईट सारी ब्लैक कोम्बिनेशन की फुल स्लीव लेस ब्लाउज पेहने खुबसूरत सी लड़की ने आंखें उपर की ओर सारे लोग बस देखते ही रहे। उसके बदन पर काला लंबा ब्लेजर भी था और सर पर वो कैंप,
मिष्टीने इतनी बड़ी अचीवमेंट हासिल की थी । पर फिर भी उसकी आंखों में चमक थी। वो फिकी लग रही थी।
सारे स्टुडेंट के पैरेंट्स वहां मौजूद थे! आज कोलेज में पर मिष्टी का कोई नहीं आया था। हर साल की तरह आज भी वो अकेली थी। इतनी दुर उसके लिए कोई नहीं आता , ना किसीके पास समय था।
मिष्टी होशियार तो थी ही पर सबसे खुबसूरत भी। सारा फंक्शन ओवर होने के बाद मिष्टी ने सबको देखा ओर अपनी जगह पर चली गई। वो सोच रही थी। क्या मामाजी को फोन कर बतादे, दो बार उसने फोन हाथों में लेती ओर रख देती । एक डर था उसके मन में ,
बाकी पैरेंट्स और बच्चों को साथ में खुश होता देख कर मिष्टी का दिल भी जोर जोर से रोने का कर रहा था। क्या जब पैरेंट्स होते हैं वो भी हमारी खुशी इसतरह सेलिब्रेट करते हैं।
कया उसके भी पैरेंट्स होते वो भी ऐसै होते हैं? वो भी इतना इनजोय करती अपने अचीवमेंट पर ….!
खुशी ने मिष्टी के जाते हुए देखा ओर उसके पीछे पीछे आ गई। खुशी ने उसके कन्धे पर हाथ रखकर सवाल किया ने कहा,” “क्या बात है मिष्टी?”
खुशी को सबकुछ पता था। फिर भी ले मिष्टी के चेहरे पर खुशी देखना चाहती थी।
उसने कहा ने कहा,””अरे ! भाई ऐसी क्यों खडी हो फोन करो अपने रिलेटिव्स को?” मिष्टी जो अपने अकेलेपन में आंसुओं को बेहने दे रही थी। अपने पीछे किसी की आवाज सुन कर अपने आंसु साफ कर पलट गई। ओर स्माइल कर , खुशी तुम?
खुशी मिष्टी की अजीज दोस्त में से एक वैसे दोस्त तो सारे थे। मिष्टी के, पर वो इस खुशी के मोक्के पर किसी को परेशान नहीं करना चाहती थी।
उसकी मासूमियत ओर अच्छे सोफ्ट नेचर की वजह से सब उसे पंसद करते थे। खुशी बस दोस्त नहीं एक बेहेन से बढ़कर थी खुशी के लिए,
अरे एकबार फोन करके तो देखो में 100%शोर हूं, तुम्हारी वो खडूस मामी तुम्हारी अचीवमेंट से खुश जरुर होगी।
उसे मिष्टी का जवाब पता था। पर उसके हिसाब से इतनी बड़ी अचीवमेंट मिलने के बाद सारे लोग हमारा कुतुहल ही करते हैं। वैसे ये भी करेगी ओर शी के फोर्स करने के बाद , क्या था फिर?
मिष्टी ने खुशी की बातों से इन्स्पायर होकर सर हिलाया उसके अंदर की उदासी चली गई ओर उसने हाथ में पकड़े फोन को कसकर पकड़ कर आंखें बंद कर भगवान जी का नाम लेकर कर दिया नंबर डायल।
उसके दिल की धड़कन तेज हो गई थी। जब उसने वो एग्जाम दिये थे तब भी उसका दिल इतना बुरी तरह नहीं धड़का था। ये तो उससे भी बड़ा टास्क था।
दो से तीन बार रिंग गई पर फोन नहीं उठा इसलिए फिर ओर एकबार फोन लगाकर मिष्टी दुसरी तरफ से फोन उठने का इंतजार करने लगी। जैसे जैसे रिंग बजती मिष्टी की दिल की धड़कन तेज हो जा रही थी। किसी अनचाहे डर से ,
फोन उठते ही …
Hello mamaji… में इतनी खुश हूं की पता नहीं सकती।
मेरे एग्जाम का परिणाम आ गया है। ओर में…. मिष्टी आगे कुछ बोलती इतने में उसकी बात काटते हुए रेखा जी की कड़कड़ाती आवाज सुनाई दी।
“ओहो, महारानी अब आपका हो गया हो तो में कुछ बोलू?”
मिष्टी के कुछ बोलने से पहले ही उसे चुप करा दिया गया था।
दुसरी तरफ
खुशी की बातों से झूम रही मिष्टी का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया। और उसने हल्की ने कहा,”सी उदासी भरी आवाज में कहा , बोलिए ना मामीजी, में सुन रही हूं आपकी बात ! फिर हल्की ने कहा,”सी स्माइल कर आप कैसी हैं?
दुसरी तरफ से रेखा जी ने कहा,” हां सुन रही हो तो कोई हमपर ऐहसान नहीं कर रही हो। ओर आगे उसकी अगले सवाल जवाब बड़े ही रुखे स्वर में दिया ने कहा,” मिष्टी की बात सुनकर हां हम तो ठिक ही है , अभी जिंदा है। बात कर रहे हैं तो मरे नहीं होंगे। “
मिष्टी को बुरा लगा था । आज वो उनसे पुरे साढे चार साल बाद बात कर रही थी। वा चाहती थी वो भी उसके साथ प्यार से बात करें पर नहीं जो पहले कभी नहीं हुआ वो कैसे एकदम से होगा भला। पत्थर का दिल कभी पिघल सकता है क्या? सामने खड़े खुशी के पता चल गया था। मिष्टी के आंसु ओर उतरा फेस देखकर वो मिष्टी के हाथों से फोन लेकर उस खडउस मामीजी पर गुस्सा उतारना चाहतीं थीं। पर इतने मे उसे किसीने आवाज दी ओर वो वहां से चलीं गईं।
यही रेखा जी की बातों ने उसके गालों पर आंसु ले आये थे। मिष्टी अपनी बात एक्सप्लेन करते हुए बोली ने कहा,” मामी हमारा वो मतलब नहीं था। हम तो आपका हालचाल पूछ ….?”
पर यहां भी रेखाजी ने मिष्टी को अपनी बात पुरी नहीं करने दी। ओर अपनी बात जारी रखते हुए बोली ने कहा,” हां वही तो एक रेह गया था। तेरे मुंह से सुनना और क्या? हमारे इतने भी बुरे दिन नहीं आये है। जो तुम पुछने पर ही हमें अच्छा लगेगा। “
ओर अपनी बात जारी रखते हुए बोली ने कहा,” आने वाले एक महिने में ऋतु की शादी है , तुमको घर आना होगा? शादी ब्याह का घर है, इसलिए! हम ओर कुछ नही सुनना चाहते। हमें हमारे तुमपर खर्च किये गये पैसों का भी कोई लाभ मिलना चाहिए ना?”
दुसरी तरफ
मिष्टी आंखों में आये आंसू साफ कर भरे गले से बोली, “मामी पर मेरी वो, उसकी बात रेखा जी ने पुरी नहीं होने दि ओर गुस्से से चीख पड़ी। बहुत हुई पढ़ाई ने कहा,”लिखाई हमारे पास इतने पैसे नहीं हैं । अब हमें अपनी बेटी की शादी करनी है।तेरे मामा ने बहोत किया तुझपर खर्चा, अब हमसे ना हो पायेगा लड़की , पेहले ही तुझे यहां तक पढ़ाने के लिए घर गिरवी रखना पड़ा है! “
ये सुनकर तो मिष्टी के पैरों तले जमीन निकल गई। उसे नहीं पता था, उसके मामाजी उसको पढ़ाने के लिए इस हदतक जा सकते हैं। आज मिस्टर भरत वैराग्य का कद मिष्टी के जिंदगी में ओर भी ऊंचा हो गया था। मिष्टी रेखा जी के आगे की बातो से अपने ख्यालों से बाहर निकल आई थी।
रेखा जी ने कहा,” तुम्हारे मां बाप ने तो तुम्हें पैदा कर खुद मर गये। ओर तुम जैसी कलमुंही को हमारे लिए छोड़ गये। हमारे सर पर मंडराने के लिए, पता था वो मरने वाले हैं तो ओलाद पैदा कर रखी ही क्यों थी? “
अपनी मामी की बातें सुनकर मिष्टी को रोना आ रहा था। उसने मुंह पर हाथ रख लिया और अपनी आवाज बाहर ना आए इसलिए होंठों को दांतों तले दबा लिया। इस कदर उसने अपने होठो को भींच लिया था की उसके होंठों से खुन आने लगा था।
रेखा जी ने कहा,” अब कयो बोल नहीं रही है । मुंह सील गया है क्या तुम्हारा? मेरी एकबात कान खोलकर सुन ले लड़की ये बातें जो भी मेंने तुमसे कही है। वो अगर तेरा मामा को पता चली तो समझ लें तुम्हारा ओर हमारा रिश्ता उसी दिन टुट जायेगा ओर फोन कट कर गुस्से में फ़ोन को सोफे पर रख कर यहां से वहां चक्कर काटने लगी ।”
उनको बहुत गुस्सा आ रहा था अपने पति पर । खुद की बेटी को उन्होंने बस दिल्ली अपने भाई के घर भेज दिया था । पढ़ने के लिए ओर इस अनाथ लड़की को उनको पता चले बगैर ही बाहर विदेश भेज दिया था। उसका सपना पुरा करने , उसका सपना सपना ओर हमारा क्या था?
जिसका गुस्सा रेखा जी के अंदर ठुसठुसकर भरा हुआ था।ओर वो अब उसका सारा हिसाब किताब मिष्टी से लेने वाली थी।
मिष्टी मुखर्जी
उम्र 21साल , बेहद कयुट और मासुम लड़की ,
नीली आंखें, काले घुंघराले बाल, खुबसूरत लड़की देखते ही नजरे भी धोखा दे जाये। इतनी खुबसूरत अप्सरा की तरह मासुम जिंदा दिल लड़की मम्मी पापा बचपन में ही चल बसे तबसे वो अपने मामाजी के साथ रेहती थी। पर मामीजी उससे बहुत चिढ़ती थी। जो बस उसे हर समय ताना मारती नहीं तो खरी खोटी सुना कर चली जाती थी।
Jarmani AMIS की टॉपर , जिसका सपना है डॉक्टर बनना । यहां तक आने पर क्या डिसीजन लेगी मिष्टी?
देखते हैं आगे कैसे जवाब देती है । मिष्टी अपनी मामी रेखा वैराग्य को , या अपने अरमानों और सपनों का गला घोटकर करेगी उनके मन की ?
दुसरी तरफ
मुंबई, बेहतरीन होटल , रुम नंबर 36
करीब पाच लोग अंदर बैठे हुए थे। डोर बाहर खड़े बोड़ी गार्ड्स ने खोला ओर डोर पर खड़े शख्स को अंदर जाने दिया, थोडासा डरे सेहमे मिस्टर भरत जाकर वही खडे हो गए। उनके समझ नहीं आ रहा था। अब उनको यहां मिटींग के लिए क्यों बुलाया गया है। बाक़ी लोग सामने देखते हुए बोले ,”कहां तक आ गई है। शादी की तैयारी?”
मिस्टर भरत ने कहा,” जो कबसे सर नीचे कर खड़े थे। आज भी उनके किस्मत पर यकीन नहीं हो रहा था। जिस कंपनी में वो बस एक अकाउंट मेनेजर है , उस घर के लोग उनकी बेटी को अपनी बहु बनाने के लिए तैयार हो गए।”
सिंघानिया फैमिली मुंबई की प्रसिद्ध फैमिली में से एक, ओर एक ट्रेडीशनल फैमिली भी जो पुराने ख्यालों की है। मिस्टर माणिक सिंघानिया इस फैमिली के नींव रखने वाले शख्स आज भी बहुत सारे डिसीजन उनके हाथों में होते है। जैसे की शादी ओर बच्चों के बारे जो भी डिसीजन होते वो इनके शब्दों पर होते हैं।
क्यों भरत इतना क्यों सोच रहे हो! भाई हमारे बेटे ओर बेटी की शादी है , हम चाहते हैं तुम्हारी बेटी की सारी ज्वेलरी और उसका खर्चा हमारी तरफ से हो! भरत वैराग्य को झटका लगा था। ये सिंघानिया परिवार वाले उनको चोंकाने का एक भी मोक्का नहीं छोड़ रहे थे। अब सारा शादी का सारा खर्चा भी वही लोग उठाने की बात कर रहे थे। क्या सच में उनके भाग इतने खुले गये थे की , उनके लिए ये खुशी की बात भी थी पर वो अपने आत्मसम्मान को गिरवी नहीं रखना चाहते थे। भले ही वो फैमिली कितनी भी अमीर क्यो ना हो? वो सारा खर्चा खुद की मेहनत और बलबुते पर करना चाहते थे। भरत वैराग्य बड़े ही सीधे ओर सरल व्यक्ति जिनके अंदर अच्छाई कुटकुट कर भरी हुई थी। उनके पास जो भी था। वो उसमें खुश थे।उनकी हिचकिचाहट देखकर मिसेज रोहिनी सिंघानिया बोल पड़ी,” इतना भी क्या शर्माना मिस्टर वैराग्य अब अपनी बेटी हमारे घर में दी है तो …? “
पर वो अपनी बात पुरी नहीं कर पाई सामने बैठे चारों लोग उनको गुस्से से घुर रहे थे।
क्या लगता है आपको? क्यों कर रहे होंगे इतनी बड़ी फैमिली वाले अपने ही कंपनी में काम करने वाले मेनेजर की बेटी से अपने बेटे की शादी?